कभी सोचा था कि जो दोस्त हमेशा हंसते-मुस्कुराते हमारे साथ होता है, एक दिन अचानक ऐसी खबर दे जाएगा कि दिल दहल उठेगा? जाहिद मेरा बचपन का दोस्त है—हमने साथ खेला, साथ बड़े हुए, और अब वही दोस्त अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझ रहा है। लेकिन उससे भी बड़ा सदमा यह है कि उसकी नन्ही परी अब इस दुनिया में नहीं रही।



बस दो दिन पहले की बात है… हम सब साथ बैठे थे, हंसी-मजाक कर रहे थे। जाहिद हमेशा की तरह अपने परिवार की बातें कर रहा था, अपनी तीन साल की बेटी की मासूमियत के किस्से सुना रहा था। वह कह रहा था—"यार, मेरी बेटी बड़ी होकर डॉक्टर बनेगी, मैं उसके लिए सबकुछ करूंगा!" लेकिन उसे क्या पता था कि उसकी छोटी-सी दुनिया इस बेरहम सड़क पर उजड़ जाएगी?



कल रात का मंजर सोचकर ही रुह कांप जाती है। जाहिद अपनी स्कूटी सड़क किनारे रोककर पानी पीने के लिए रुका था। उसकी पत्नी और बच्चे भी वहीं थे। तभी नशे में धुत एक डंपर वाले ने पीछे से इतनी जोर की टक्कर मारी कि जाहिद और उसकी बेटी हवा में उछलकर दूर जा गिरे। जब लोगों ने दौड़कर देखा, तो मासूम बच्ची खून से लथपथ पड़ी थी—बिलकुल निश्चल, बिना हिले-डुले। जाहिद तड़प रहा था, दर्द से कराह रहा था, लेकिन शायद उससे ज्यादा तकलीफ उसे इस बात की थी कि उसकी बेटी उसकी आंखों के सामने दम तोड़ चुकी थी।


आज जाहिद जीवन दान अस्पताल में भर्ती है, गंभीर हालत में। लेकिन मैं सोचता हूं—क्या वो सिर्फ शरीर से घायल है? क्या उसका दिल ठीक से धड़क पाएगा, जब उसे हर पल अपनी बेटी की याद आएगी? क्या उसका सपना, उसकी उम्मीदें, उसकी हंसी दोबारा लौट पाएगी?


आखिर कब तक बैरसिया की सड़कें हमारे अपनों को लीलती रहेंगी?


यह कोई पहला हादसा नहीं है। बैरसिया रोड हर दिन किसी न किसी की जिंदगी छीन लेती है। लेकिन फिर भी, न सरकार सुनती है, न प्रशासन कोई ठोस कदम उठाता है। आखिर कब तक?


आज जाहिद अस्पताल में है, उसकी मासूम बेटी इस दुनिया को छोड़ चुकी है, लेकिन कल यह हादसा किसी और के साथ हो सकता है। क्या हम तब भी चुप रहेंगे? अब नहीं!


अब यह लड़ाई जाहिद के लिए, उसकी बेटी के लिए, और हर उस परिवार के लिए है जिसने इस जानलेवा सड़क पर अपनों को खो दिया। हमें सरकार को मजबूर करना होगा कि इस सड़क को सुरक्षित बनाए, फोरलेन का निर्माण हो, भारी वाहनों के लिए अलग व्यवस्था हो, और ट्रैफिक नियमों का सख्ती से पालन हो।


बैरसिया की आवाज अब दबने नहीं देंगे—हम लड़ेंगे, ताकि कोई और जाहिद अपने सपनों को यूं टूटते न देखे।

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